Tuesday, June 12, 2012

लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय

आप अपने निवास स्थान में उत्तर-पूर्व दिशा में एक साफ जगह पर स्थान चुन लीजिये,उस स्थान को गंदगी आदि से मुक्त कर लीजिये, फिर एक साफ लकडी का पाटा उस स्थानपर रख लीजिये,और एक चमेली के तेल की सीसी, पचास मोमबत्ती सफेद और पचासमोमबत्ती हरी और एक माचिस लाकर रख लीजिये। अपना एक समय चुन लीजिये जिससमय आप जरूर फ्री रहते हों, उस समय में आप घडी मिलाकर ईश्वर से धन प्राप्त करने केउपाय करना शुरु कर दीजिये। पाटे को पानी और किसी साफ कपडे से साफ करिये, एकहरी मोमबत्ती और एक सफेद मोमबत्ती दोनो को चमेली के तेल में डुबोकर नहलालीजिये,दोनो को एक माचिस की तीली जलाकर उनके पैंदे को गर्म करने के बाद एकदूसरे से नौ इंच की दूरी पर बायीं (लेफ्ट) तरफ हरी मोमबत्ती और दाहिनी (राइट) तरफसफेद मोमबत्ती पाटे पर चिपका दीजिये। दुबारा से माचिस की तीली जलाकर पहले हरीमोमबत्ती को और फिर सफेद मोमबत्ती को जला दीजिये,दोनो मोमबत्तिओं को देखकरमानसिक रूप से प्रार्थना कीजिये ष्हे धन के देवता कुबेर ! मुझे धन की अमुक (जिस कामके लिये धन की जरूरत हो उसका नाम) काम के लिये जरूरत है, मुझे ईमानदारी से धनको प्राप्त करने में सहायता कीजियेष्, और प्रार्थना करने के बाद मोमबत्ती को जलता हुआछोड कर अपने काम में लग जाइये। दूसरे दिन अगर मोमबत्ती पूरी जल गयी है, तो उसजले हुये मोम को वहीं पर लगा रहने दें, और नही जली है तो वैसी ही रहने दें, दूसरीमोमबत्तियों को पहले दिन की तरह से ले लीजिये, और पहले जली हुयी मोमबत्तियों सेएक दूसरी के नजदीक लगाकर जलाकर पहले दिन की तरह से वही प्रार्थना करिये, इसतरह से धीरे धीरे मोमबत्तिया एक दूसरे की पास आती चलीं जायेगी, जितनी हीमोमबत्तियां पास आती जायेंगी, धन आने का साधन बनता चला जायेगा, और जैसे हीदोनो मोमबत्तियां आपस में सटकर जलेंगी, धन प्राप्त हो जायेगा। जब धन प्राप्त हो जाये तोपास के किसी धार्मिक स्थान पर या पास की किसी बहती नदी में उस मोमबत्तियों केपिघले मोम को लेजाकर श्रद्धा से रख आइये या बहा दीजिये, जो भी श्रद्धा बने गरीबों कोदान कर दीजिये, ध्यान रखिये इस प्रकार से प्राप्त धन को किसी प्रकार के गलत काम मेंमत प्रयोग करिये,अन्यथा दुबारा से धन नही आयेगा।

   
दूसरे प्रकार के उपाय में कुछ धन पहले खर्च करना पडता है,इस उपाय के लिये आपकोजो भी मुद्रा आपके यहां चलती है आप ले लीजिये जैसे रुपया चलता है तो दस दस के पांचनोट ले लीजिये डालर चलता है तो पांच डालर ले लीजिये आदि। बाजार से पांच नगीनेजैसे गोमेद एमेथिस्ट जेड सुनहला गारनेट ले लीजिये, यह नगीने सस्ते ही आते है, साथही बाजार से समुद्री नमक भी लेते आइये। यह उपाय गुरुवार से शुरु करना है, अपने घरमे अन्दर एक ऐसी जगह को देखिये जहां पर लगातार सूर्य की रोशनी कम से कम तीनघंटे रहती हो, एक पोलीथिन के ऊपर पहले पांच नोट रखिये, उनके ऊपर एक एक नगीनारख दीजिये, और उन नगीनो तथा नोटों पर समुद्री नमक पीस कर थोडा थोडा छिडकदीजिये और उन्हे सूर्य की रोशनी में लगातार तीन घंटे के लिये छोड दीजिये। तीन घंटेबाद उन नोटों और नगीनों को समुद्री नमक को उसी पोलीथीन पर पर साफ कर लीजिये,और उस पोलीथिन वाले नमक को अपने घर के मुख्य दरवाजे पर डाल दीजिये, उननगीनों और नोटों को अपने पर्स में रख लीजिये, अगर कोई तुम्हारा जान पहिचान का याकोई रिस्तेदार तुम्हारे पास आता है तो उसे एक नगीना कोई सा भी उसी गुरुवार को यहकहकर दीजिये कि यह नगीना भाग्य बढाने वाला है, और एक नोट उनमें से किसी बच्चेको बिस्कुट लाने के लिये या किसी प्रकार बिल चुकाने के काम में उसी दिन ले लीजिये,दूसरे गुरुवार को दूसरा नगीना किसी को फिर दान कर दीजिये और एक नोट किसी बच्चेया किसी प्रकार के घरेलू खर्चे में खर्च कर दीजिये,यही क्रम लगातार चार गुरुवार तककरना है, पांचवे गुरुवार को बचा हुआ एक नगीना और नोट अपनी तिजोरी या धन रखनेवाले स्थान में रख लीजिये, आपके पास लगातार धन का प्रवाह शुरु हो जायेगा, उस धनमें से 3: दान करते रहिये, जब तक वह नगीना और नोट आपके पास रहेगा, धन की कमीनही आ सकती है।

कहीं आप भूतप्रेत बाधा से तो प्रभावित नहीं है ?


प्रायः सुनने में आता है कि उसके ऊपर भूत आ गया है या उसको प्रेत ने पकड़ लिया है जिसक कारण उसके घर वाले बहुत परेशान हैं। उसको संभाल ही नहीं पाते हैं। तान्त्रिक, मौलवी या ओझा के पास जाकर भी कुछ नहीं हुआ है। समझ नहीं आता है क्या करें।
भूत-प्रेत बाधा है या नहीं
आप अपनी या किसी की कुण्डली देखें और यदि ये योग उसमें विद्यमान हैं तो समझ लें कि जातक या जातिका भूत-प्रेत बाधा से परेशान है। ये योग इस प्रकार हैं-
पहला योग-कुण्डली के पहले भाव में चन्द्र के साथ राहु हो और पांचवे और नौवें भाव में क्रूर ग्रह स्थित हों। इस योग के होने पर जातक या जातिका पर भूत-प्रेत, पिशाच या गन्दी आत्माओं का प्रकोप शीघ्र होता है। यदि गोचर में भी यही स्थिति हो तो अवश्य ऊपरी बाधाएं तंग करती हैं।
दूसरा योग-यदि किसी कुण्डली में शनि, राहु, केतु या मंगल में से कोई भी ग्रह सप्तम भाव में हो तो ऐसे लोग भी भूत-प्रेत बाधा या पिशाच या ऊपरी हवा आदि से परेशान रहते हैं।
तीसरा योग-यदि किसी की कुण्डली में शनि-मंगल-राहु की युति हो तो उसे भी ऊपरी बाधा, प्रेत, पिशाच या भूत बाधा तंग करती है। उक्त योगों में दशा-अर्न्तदशा में भी ये ग्रह आते हों और गोचर में भी इन योगों की उपस्थिति हो तो समझ लें कि जातक या जातिका इस कष्ट से अवश्य परेशान है।
इस कष्ट से मुक्ति के लिए तान्त्रिक, ओझा, मौलवी या इस विषय के जानकार ही सहायता करते हैं। यदि कुण्डली में इस प्रकार के योग हों तो इनसे बचने के लिए योगकारक ग्रहों के उपाय अथवा यहां एक प्रयोग बता रहे हैं उसे कर सकते हैं। यहां एक मन्त्र दे रहे हैं जिसे स्नान करके हनुमान मन्दिर में 108 बार प्रतिदिन जपें और 45 दिनों तक नित्य करें। किसी भी शुक्लपक्ष के मंगलवार से प्रारम्भ कर सकते हैं।
भूत प्रेत बाधा निवारक हनुमत मन्त्र इस प्रकार है-
भूत प्रेत बाधा नाशक मन्त्र
ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ऊँ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय भूत-प्रेत पिशाच-शाकिनी-डाकिनी- यक्षणी-पूतना-मारी-महामारी, यक्ष राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षसादिकम्‌ क्षणेन हन हन भंजय भंजय मारय मारय शिक्षय शिक्षय महामारेश्वर रुद्रावतार हुं फट् स्वाहा।
उक्त मन्त्र को श्रद्धा, विश्वास के साथ जप कर मन्त्र से अभिमन्त्रित जल पीड़ित जातक या जातिका को पिलाने या छींटे मारने से इस प्रकार की बाधा से मुक्ति मिलती है।
इस मन्त्र प्रयोग को करने के लिए आपमें दृढ़ इच्छा शक्ति एवं भरपूर आत्मबल होना चहिए। यदि आप डरपोक हैं तो इस प्रयोग को न करें। आप बीमार, हृदय रोगी एवं अस्थिर प्रवृत्ति के अल्प मनोबल वाले व्यक्ति हैं तो भी इस प्रयोग को न करें। कोशिश करें किसी गुरु या जानकार से सलाह लेकर ही इस प्रयोग को करें।
निर्बल मन या अल्प मनोबली व्यक्ति के ऊपरी बाधा से मुक्ति दिलाने वाले प्रयोग को नहीं करना चाहिए। ये प्रयोग आस्तिक एवं प्रभु पर विश्वास करने वाला ही कर सकता है। यदि मनोबली है तो आप स्वयं और दूजों का लाभ पहुंचा सकते हैं।

आपका वाहन नम्बर

आज के भागमभाग दौर को सुविधाजनक और आसान बनाने के लिये, वाहन जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है. जीवन का यह अभिन्न अंग अगर हमें सुविधा देता है तो दुर्घटनाओं से ह्रदयविदारक कष्ट भी पहुंचाता है. कुछ समझदार लोगों का मानना होता है कि अगर गाड़ी चालाते समय सावधानी रखें तो जीवन मे दुर्घटनायें नही होगी. परंतु बहुत से जगहों पे ये देखने को मिलता है कि फलां आदमी बहुत ही आराम से गाड़ी चलाता है लेकिन फिर भी दुर्घटना घट गई और फलां आदमी बहुत ही गलत और बेढ़ंगे वाहन चलाता है फिर भी कभी कुछ नही होता है.

अगर हुम अंक ज्योतिष की मानें तो ये आदमी के मुलांक या भाग्यांक और गाड़ी नम्बर के मुलांक के कारण होता है.मान लें कि आपका मुलांक 1 है और गाड़ी नम्बर का कुल योग 6 या 8 आ रहा है तो दुर्घटनाओं की सम्भावना ज्यादा होती है और अगर 7 आता है तो इसकी सम्भावना कम हो जाती है. इसका कारण यह है कि 6 नम्बर मुलांक 1 के साथ शत्रु भाव रखता है जब कि 7 मित्र भाव रखता है. इसी प्रकार हर एक नम्बर का मित्र नम्बर और शत्रु नम्बर होता है जिसका वर्णन नीचे किया जा रहा है. इसकी मदद से आप बहुत हद तक ऐसे अनहोनी से बच सकते है.

अगर आपका मुलांक या भाग्यांक 1 आता है तो आपको गाड़ी नम्बर का कुल योग 1, 2, 4 या 7 रखना चाहिये. 6 या 8 नम्बर वाला वाहन ना रखें तो बेहतर होगा. आप पीले, सुनहरे, अथवा क्रीम रंग का वाहन खरीदें. नीले,भुरे, बैगनी या काले रंग की वाहन क्रय करने से बचें.

अगर आपका मुलांक या भाग्यांक 2 आता है तो आपको गाड़ी नम्बर का कुल योग 1, 2, 4 या 7 रखना चाहिये. 9 नम्बर वाला वाहन ना रखें तो बेहतर होगा. आप सफेद अथवा हल्के रंग का वाहन खरीदें. लाल अथवा गुलाबी रंग की वाहन क्रय करने से बचें.

अगर आपका मुलांक या भाग्यांक 3 आता है तो आपको गाड़ी नम्बर का कुल योग 3,6, या 9 रखना चाहिये. 5 या 8 नम्बर वाला वाहन ना रखें तो बेहतर होगा. आप पीले, बैंगनी , अथवा गुलाबी रंग का वाहन खरीदें. हल्के हरे सफेद ,भुरे रंग की वाहन क्रय करने से बचें.

अगर आपका मुलांक या भाग्यांक 4 आता है तो आपको गाड़ी नम्बर का कुल योग 1, 2, 4 या 7 रखना चाहिये. 9, 6 या 8 नम्बर वाला वाहन ना रखें तो बेहतर होगा. आप नीले अथवा भुरे रंग का वाहन खरीदें. गुलाबी या काले रंग की वाहन क्रय करने से बचें.

अगर आपका मुलांक या भाग्यांक 5 आता है तो आपको गाड़ी नम्बर का कुल योग 5 रखना चाहिये. 3, 9 या 8 नम्बर वाला वाहन ना रखें तो बेहतर होगा. आप हल्के हरे, सफेद अथवा भुरे रंग का वाहन खरीदें. पीले, गुलाबी या काले रंग की वाहन क्रय करने से बचें

अगर आपका मुलांक या भाग्यांक 6 आता है तो आपको गाड़ी नम्बर का कुल योग 3, 6, या 9 रखना चाहिये. 4 या 8 नम्बर वाला वाहन ना रखें तो बेहतर होगा. आप हल्के नीले , गुलबी , अथवा पीले रंग का वाहन खरीदें. कले रंग की वाहन क्रय करने से बचें.

अगर आपका मुलांक या भाग्यांक 7 आता है तो आपको गाड़ी नम्बर का कुल योग 1, 2, 4 या 7 रखना चाहिये. 9 या 8 नम्बर वाला वाहन ना रखें तो बेहतर होगा. आप नीले , अथवा सफेद रंग का वाहन खरीदें.

अगर आपका मुलांक या भाग्यांक 8 आता है तो आपको गाड़ी नम्बर का कुल योग 8 रखना चाहिये. 1 या 4 नम्बर वाला वाहन ना रखें तो बेहतर होगा. आप काले, नीले, अथवा बैगनी रंग का वाहन खरीदें.

अगर आपका मुलांक या भाग्यांक 9 आता है तो आपको गाड़ी नम्बर का कुल योग 9, 3, या 6 रखना चाहिये. 5 या 7 नम्बर वाला वाहन ना रखें तो बेहतर होगा. आप लाल , अथवा गुलाबी रंग का वाहन खरीदें.

कुछ उपयोगी टोटके


शत्रु शमन के लिए :
साबुत उड़द की काली दाल के 38 और चावल के 40 दाने मिलाकर किसी गड्ढे में दबा दें और ऊपर से नीबू निचोड़ दें। नीबू निचोड़ते समय शत्रु का नाम लेते रहें, उसका शमन होगा और वह आपके विरुद्ध कोई कदमनहींउठाएगा।
अकारण परेशान करने वाले व्यक्ति से शीघ्र छुटकारा पाने के लिए :
यदि कोई व्यक्ति बगैर किसी कारण के परेशान कर रहा हो, तो शौच क्रिया काल में शौचालय में बैठे-बैठे वहीं के पानी से उस व्यक्ति का नाम लिखें और बाहर निकलने से पूर्व जहां पानी से नाम लिखा था, उस स्थान पर अप बाएं पैर से तीन बार ठोकर मारें। ध्यान रहे, यहप्रयोग स्वार्थवश न करें, अन्यथा हानि हो सकती है।
शत्रुओं का नाश करे बगुलामुखी यंत्र
आज लोग अपनी विफलता से दुखी नहीं, बल्कि पड़ोसी की सफलता से दुखी हैं। ऐसे में उन लोगों को सफलता देने के लिए माताओं में माता बगलामुखी (वाल्गामुखी) मानव कल्याण के लिये कलियुग में प्रत्यक्ष फल प्रदान करती रही हैं। आज इन्हीं माता, जो दुष्टों का संहार करती हैं। अशुभ समय का निवारण कर नई चेतना का संचार करती हैं। ऐसी माता के बारे में मैं अपनी अल्प बुद्धि से आपकी प्रसन्नता के लिए इनकी सेवा आराधना पर कुछ कहने का साहस कर रहा हूं। मुझे आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि मैं माता वाल्गामुखी (बगलामुखी) की जो बातें आपसे कह रहा हूं अगर आप उसका तनिक भी अनुसरण करते हैं तो माता आप पर कृपा जरूर करेंगी, लेकिन पाठक भाइयों ध्यान रहे। इनकी साधना अथवा प्रार्थना में आपकी श्रद्धा और विश्वास असीम हो तभी मां की शुभ दृष्टि आप पर पड़ेगी। इनकी आराधना करके आप जीवन में जो चाहें जैसा चाहे वैसा कर सकते हैं। सामान्यत: आजकल इनकी सर्वाधिक आराधना राजनेता लोग चुनाव जीतने और अपने शत्रुओं को परास्त करने में अनुष्ठान स्वरूप करवाते हैं। इनकी आराधना करने वाला शत्रु से कभी परास्त नहीं हो सकता, वरन उसे मनमाना कष्टï पहुंच सकता है। वर्ष 2004 के चुनाव में तो कई राजनेताओं जिनका नाम लेना उचित नहीं है ने माता बगलामुखी की आराधना करके (पंडितों द्वारा) चुनाव भी जीते और अच्छे मंत्रालय भी प्राप्त किये। माता की यही आराधना युद्ध, वाद-विवाद मुकदमें में सफलता, शत्रुओं का नाश, मारण, मोहन, उच्चाटन, स्तम्भन, देवस्तम्भन, आकर्षण कलह, शत्रुस्तभन, रोगनाश, कार्यसिद्धि, वशीकरण व्यापार में बाधा निवारण, दुकान बाधना, कोख बाधना, शत्रु वाणी रोधक आदि कार्यों की बाधा दूर करने और बाधा पैदा करने दोनों में की जाती है। साधक अपनी इच्छानुसार माता को प्रसन्न करके इनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है। जैसा कि पूर्व में उल्लेख किया जा चुका है कि माता श्रद्धा और विश्वास से आराधना (साधना) करने पर अवश्य प्रसन्न होंगी, लेकिन ध्यान रहे इनकी आराधना (अनुष्ठान) करते समय ब्रह्मचर्य परमावश्यक है।
गृहस्थ भाइयों के लिये मैं माता की आराधना का सरल उपाय बता रहा हूं। आप इसे करके शीघ्र फल प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी देवी-देवता का अनुष्ठान (साधना) आरम्भ करने बैठे तो सर्वप्रथम शुभ मुर्हूत, शुभ दिन, शुभ स्थान, स्वच्छ वस्त्र, नये ताम्र पूजा पात्र, बिना किसी छल कपट के शांत चित्त, भोले भाव से यथाशक्ति यथा सामग्री, ब्रह्मचर्य के पालन की प्रतिज्ञा कर यह साधना आरम्भ कर सकते हैं। याद रहे अगर आप अति निर्धन हो तो केवल पीले पुष्प, पीले वस्त्र, हल्दी की 108 दाने की माला और दीप जलाकर माता की प्रतिमा, यंत्र आदि रखकर शुद्ध आसन कम्बल, कुशा या मृगचर्य जो भी हो उस पर बैठकर माता की आराधना कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। माता बगलामुखी की आराधना के लिये जब सामग्री आदि इकट्ठा करके शुद्ध आसन पर बैठें (उत्तर मुख) तो दो बातों का ध्यान रखें, पहला तो यह कि सिद्धासन या पद्मासन हो, जप करते समय पैर के तलुओं और गुह्य स्थानों को न छुएं शरीर गला और सिर सम स्थित होना चाहिए। इसके पश्चात गंगाजल से छिड़काव कर (स्वयं पर) यह मंत्र पढें- अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थाङ्गतोऽपिवा, य: स्मरेत, पुण्डरी काक्षं स बाह्य अभ्यांतर: शुचि:। उसके बाद इस मंत्र से दाहिने हाथ से आचमन करें-ऊं केशवाय नम:, ऊं नारायणाय नम:, ऊं माधवाय नम:। अन्त में ऊं हृषीकेशाय नम: कहके हाथ धो लेना चाहिये। इसके बाद गायत्री मंत्र पढ़ते हुए तीन बार प्राणायाम करें। चोटी बांधे और तिलक लगायें। अब पूजा दीप प्रज्जवलित करें। फिर विघ्नविनाशक गणपति का ध्यान करें। याद रहे ध्यान अथवा मंत्र सम्बंधित देवी-देवता का टेलीफोन नंबर है।
जैसे ही आप मंत्र का उच्चारण करेंगे, उस देवी-देवता के पास आपकी पुकार तुरंत पहुंच जायेगी। इसलिये मंत्र शुद्ध पढऩा चाहिये। मंत्र का शुद्ध उच्चारण न होने पर कोई फल नहीं मिलेगा, बल्कि नुकसान ही होगा। इसीलिए उच्चारण पर विशेष ध्यान रखें। अब आप गणेश जी के बाद सभी देवी-देवादि कुल, वास्तु, नवग्रह और ईष्ट देवी-देवतादि को प्रणाम कर आशीर्वाद लेते हुए कष्ट का निवारण कर शत्रुओं का संहार करने वाली वाल्गा (बंगलामुखी) का विनियोग मंत्र दाहिने हाथ में जल लेकर पढ़ें-ऊं अस्य श्री बगलामुखी मंत्रस्य नारद ऋषि: त्रिष्टुप्छन्द: बगलामुखी देवता, ह्लींबीजम् स्वाहा शक्ति: ममाभीष्ट सिध्यर्थे जपे विनियोग: (जल नीचे गिरा दें)। अब माता का ध्यान करें, याद रहे सारी पूजा में हल्दी और पीला पुष्प अनिवार्य रूप से होना चाहिए
ध्यान- मध्ये सुधाब्धि मणि मण्डप रत्न वेद्यां,
सिंहासनो परिगतां परिपीत वर्णाम,
पीताम्बरा भरण माल्य विभूषिताड्गीं
देवीं भजामि धृत मुद्गर वैरिजिह्वाम
जिह्वाग्र मादाय करेण देवीं,
वामेन शत्रून परिपीडयन्तीम,
गदाभिघातेन च दक्षिणेन,
पीताम्बराढ्यां द्विभुजां नमामि॥

शराब छुड़ाने के उपाय


यदि कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा शराब पीता है तो उसकी पत्नी मंगल या शनिवार को चरखा चलाए।जो व्यक्ति जरूरत से ज्यादा शराब का सेवन करता है तो उसकी पत्नी अपने पैरों के बिच्छुए को पानी से धोकर तथा शराब की बोतल में से थोड़ी सी शराब लेकर उसमें अपने बिच्छुए डाल दे। त्रयोदशी या पूर्णमाशी के दिन वह शराब निकाल कर दूसरी किसी शराब की बोतल में डाल दें। ऐसा पांच मंगलवार या शनिवार करने से शराब पीने की लत छूट जाती है।जो जातक शराब का सेवन अधिक करता है तो उसके लिए सात पताशे लेकर प्रत्येक पताशे में सरसों के तेल की दो-चार बूंदे डालकर फिर बताशे को हाथ से मसलकर घर से बाहर कहीं दूर जाकर फेंक दें। ऐसा ११ दिन लगातार करने से शराब पीने की लत छूट जाती है।
जब शराब पीने की इच्छा हो तब किशमिश का १-१ दाना मुंह में डालकर चूसें किशमिश का शरबत पीने से भी दिमाग को ताकत मिलेगी और धीरे-धीरे शराब छोड़ने की क्षमता आ जायेगी l साथ ही इस मंत्र का जप करें : - " ॐ ह्रीं यं यश्वराये नमः " अथवा जब शराबी निद्रा में हो तो कुटुम्बी उसकी चोटी वाले भाग में देखते हुए मन ही मन इसका जप करें
सोने-चांदी का काम करने वाले सोनारों के पास से शुद्ध गंधक का तेज़ाब यानि कि सल्फ़्युरिक एसिड ले आइए और आप जो शराब पीने जा रहे हैं उसके बने हुए पैग में चार बूंद यह तेज़ाब डाल दीजिए और जैसे सेवन करते है वैसे ही पीजिए और आप देखेंगे कि धीरे-धीरे आपकी शराब पीने की इच्छा अपने आप ही कम होने लगी है । इसी क्रम में आप एक दिन खुद ही शराब के प्रति अरुचि महसूस करने लगेंगे और पीना अपने आप छूट जाएगा ,ध्यान रखिए कि आप और कोई उपाय न करें बस खाने पर ध्यान दें कि स्वास्थ्यवर्धक आहार लें ।दूसरा यह कि शिमला मिर्च(कैप्सिकम) जो कि मोटी-मोटी होती हैं व खाने में तीखी नहीं होती व सब्जी बनाने में प्रयोग करी जाती हैं ,ले लीजिए और उनका जूसर से रस निकाल लीजिए व इस रस का सेवन दिन में दो बार आधा कप नाश्ते या भोजन के बाद करें । आप चमत्कारिक रूप से पाएंगे कि आपकी शराब की तलब अपने आप घटने लगी है और एक दिन आप खुद ही पीने से इंकार कर देते हैं चाहे कोई कितना भी दबाव क्यों न डाले । ये दोनो उपाय सन्यासियों के आजमाए हुए हैं जोकि लोगों की शराब छुड़ाने के प्रसिद्ध रहे हैं। आप यकीन मानिये कि इन सरल से उपायों से चालाक किस्म के लोग मजबूर शराबियों की आदत छुड़ाने की दवा के रूप में देकर लाखों रुपए कमाते हैं लेकिन आयुषवेद परिवार चूंकि सेवा के लिये कटिबद्ध है इसलिये हमारा उद्देश्य मात्र आपको सही सलाह देना है। यदि आपको कोई आयुर्वेदिक औषधि जो कि आयुषवेद की तरफ से बतायी गयी है और आपके क्षेत्र में नहीं मिल रही है तो हम उसे आपके आदेश पर बना कर मात्र उत्पादन मूल्य पर स्पीड पोस्ट से आप तक पहुंचा देते हैं।
तो अपनी शराब में यह होम्योपैथिक दवा प्रति लीटर में बारह बूंद मिला कर रख लें और यकीन मानिए कि जो लोग आपके साथ शराब पीते हैं वे दो महीने में खुद ही शराब पीना बंद कर देंगे,दवा का नाम है SPIRTAS GLANDIUM QUERCUS . यह वही दवा है जिसका प्रचार कर-करके तमाम दवाखानों ने करॊड़ो रुपए कमा लिए हैं । हम किस दवा कए बाद जब शराबी की आदत छूट जाती है तो उसे दो माह तक सुबह शाम दो-दो चम्मच गुलकन्द(प्रवाल मिश्रित) खिलाते हैं और इसके बीस मिनट बा्द दो चम्मच अश्वगंधारिष्ट बराबर पानी के साथ देते हैं । इससे उसका खोया स्वास्थ्य वापस आ जाता है । आप भी इसी तरह से अपनी टूटती हुई कसमों से बच सकते हैं और यदि नियमित रूप से प्राणायाम करते हैं तो फिर तो सोने में सुगंध जैसी बात है ।

तंत्र से लक्ष्मी प्राप्ति के प्रयोग




नागेश्वर तंत्रःनागेश्वर को प्रचलित भाषा में ‘नागकेसर’ कहते हैं। काली मिर्च के समान गोल, गेरु के रंग का यह गोल फूल घुण्डीनुमा होता है। पंसारियों की दूकान से आसानी से प्राप्त हो जाने वाली नागकेसर शीतलचीनी (कबाबचीनी) के आकार से मिलता-जुलता फूल होता है। यही यहाँ पर प्रयोजनीय माना गया है।१॰ किसी भी पूर्णिमा के दिन बुध की होरा में गोरोचन तथा नागकेसर खरीद कर ले आइए। बुध की होरा काल में ही कहीं से अशोक के वृक्ष का एक अखण्डित पत्ता तोड़कर लाइए। गोरोचन तथा नागकेसर को दही में घोलकर पत्ते पर एक स्वस्तिक चिह्न बनाएँ। जैसी भी श्रद्धाभाव से पत्ते पर बने स्वस्तिक की पूजा हो सके, करें। एक माह तक देवी-देवताओं को धूपबत्ती दिखलाने के साथ-साथ यह पत्ते को भी दिखाएँ। आगामी पूर्णिमा को बुध की होरा में यह प्रयोग पुनः दोहराएँ। अपने प्रयोग के लिये प्रत्येक पुर्णिमा को एक नया पत्ता तोड़कर लाना आवश्यक है। गोरोचन तथा नागकेसर एक बार ही बाजार से लेकर रख सकते हैं। पुराने पत्ते को प्रयोग के बाद कहीं भी घर से बाहर पवित्र स्थान में छोड़ दें।
किसी शुभ-मुहूर्त्त में नागकेसर लाकर घर में पवित्र स्थान पर रखलें। सोमवार के दिन शिवजी की पूजा करें और प्रतिमा पर चन्दन-पुष्प के साथ नागकेसर भी अर्पित करें। पूजनोपरान्त किसी मिठाई का नैवेद्य शिवजी को अर्पण करने के बाद यथासम्भव मन्त्र का भी जाप करें ‘ॐ नमः शिवाय’। उपवास भी करें। इस प्रकार २१ सोमवारों तक नियमित साधना करें। वैसे नागकेसर तो शिव-प्रतिमा पर नित्य ही अर्पित करें, किन्तु सोमवार को उपवास रखते हुए विशेष रुप से साधना करें। अन्तिम अर्थात् २१वें सोमवार को पूजा के पश्चात् किसी सुहागिनी-सपुत्रा-ब्राह्मणी को निमन्त्रण देकर बुलाऐं और उसे भोजन, वस्त्र, दान-दक्षिणा देकर आदर-पूर्वक विदा करें।इक्कीस सोमवारों तक नागकेसर-तन्त्र द्वारा की गई यह शिवजी की पूजा साधक को दरिद्रता के पाश से मुक्त करके धन-सम्पन्न बना देती है।
पीत वस्त्र में नागकेसर, हल्दी, सुपारी, एक सिक्का, ताँबे का टुकड़ा, चावल पोटली बना लें। इस पोटली को शिवजी के सम्मुख रखकर, धूप-दीप से पूजन करके सिद्ध कर लें फिर आलमारी, तिजोरी, भण्डार में कहीं भी रख दें। यह धनदायक प्रयोग है। इसके अतिरिक्त “नागकेसर” को प्रत्येक प्रयोग में “ॐ नमः शिवाय” से अभिमन्त्रित करना चाहिए।
कभी-कभी उधार में बहुत-सा पैसा फंस जाता है। ऐसी स्थिति में यह प्रयोग करके देखें-किसी भी शुक्ल पक्ष की अष्टमी को रुई धुनने वाले से थोड़ी साफ रुई खरीदकर ले आएँ। उसकी चार बत्तियाँ बना लें। बत्तियों को जावित्री, नागकेसर तथा काले तिल (तीनों अल्प मात्रा में) थोड़ा-सा गीला करके सान लें। यह चारों बत्तियाँ किसी चौमुखे दिए में रख लें। रात्रि को सुविधानुसार किसी भी समय दिए में तिल का तेल डालकर चौराहे पर चुपके से रखकर जला दें। अपनी मध्यमा अंगुली का साफ पिन से एक बूँद खून निकाल कर दिए पर टपका दें। मन में सम्बन्धित व्यक्ति या व्यक्तियों के नाम, जिनसे कार्य है, तीन बार पुकारें। मन में विश्वास जमाएं कि परिश्रम से अर्जित आपकी धनराशि आपको अवश्य ही मिलेगी। इसके बाद बिना पीछे मुड़े चुपचाप घर लौट आएँ। अगले दिन सर्वप्रथम एक रोटी पर गुड़ रखकर गाय को खिला दें। यदि गाय न मिल सके तो उसके नाम से निकालकर घर की छत पर रख दें।
जिस किसी पूर्णिमा को सोमवार हो उस दिन यह प्रयोग करें। कहीं से नागकेसर के फूल प्राप्त कर, किसी भी मन्दिर में शिवलिंग पर पाँच बिल्वपत्रों के साथ यह फूल भी चढ़ा दीजिए। इससे पूर्व शिवलिंग को कच्चे दूध, गंगाजल, शहद, दही से धोकर पवित्र कर सकते हो। तो यथाशक्ति करें। यह क्रिया अगली पूर्णिमा तक निरन्तर करते रहें। इस पूजा में एक दिन का भी नागा नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर आपकी पूजा खण्डित हो जायेगी। आपको फिर किसी पूर्णिमा के दिन पड़नेवाले सोमवार को प्रारम्भ करने तक प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। इस एक माह के लगभग जैसी भी श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना बन पड़े, करें। भगवान को चढ़ाए प्रसाद के ग्रहण करने के उपरान्त ही कुछ खाएँ। अन्तिम दिन चढ़ाए गये फूल तथा बिल्वपत्रों में से एक अपने साथ श्रद्धाभाव से घर ले आएँ। इन्हें घर, दुकान, फैक्ट्री कहीं भी पैसे रखने के स्थान में रख दें। धन-सम्पदा अर्जित कराने में नागकेसर के पुष्प चमत्कारी प्रभाव दिखलाते हैं।
मार्जारी तंत्र :
मार्जारी अर्थात्‌ बिल्ली सिंह परिवार का जीव है। केवल आकार का अंतर इसे सिंह से पृथक करता है, अन्यथा यह सर्वांग में, सिंह का लघु संस्करण ही है। मार्जारी अर्थात्‌ बिल्ली की दो श्रेणियाँ होती हैं- पालतू और जंगली। जंगली को वन बिलाव कहते हैं। यह आकार में बड़ा होता है, जबकि घरों में घूमने वाली बिल्लियाँ छोटी होती हैं। वन बिलाव को पालतू नहीं बनाया जा सकता, किन्तु घरों में घूमने वाली बिल्लियाँ पालतू हो जाती हैं। अधिकाशतः यह काले रंग की होती हैं, किन्तु सफेद, चितकबरी और लाल (नारंगी) रंग की बिल्लियाँ भी देखी जाती हैं। घरों में घूमने वाली बिल्ली (मादा) भी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कराने में सहायक होती है, किन्तु यह तंत्र प्रयोग दुर्लभ और अज्ञात होने के कारण सर्वसाधारण के लिए लाभकारी नहीं हो पाता। वैसे यदि कोई व्यक्ति इस मार्जारी यंत्र का प्रयोग करे तो निश्चित रूप से वह लाभान्वित हो सकता है।
गाय, भैंस, बकरी की तरह लगभग सभी चौपाए मादा पशुओं के पेट से प्रसव के पश्चात्‌ एक झिल्ली जैसी वस्तु निकलती है। वस्तुतः इसी झिल्ली में गर्भस्थ बच्चा रहता है। बच्चे के जन्म के समय वह भी बच्चे के साथ बाहर आ जाती है। यह पॉलिथीन की थैली की तरह पारदर्शी लिजलिजी, रक्त और पानी के मिश्रण से तर होती है। सामान्यतः यह नाल या आँवल कहलाती हैं।
इस नाल को तांत्रिक साधना में बहुत महत्व प्राप्त है। स्त्री की नाल का उपयोग वन्ध्या अथवा मृतवत्सा स्त्रियों के लिए परम हितकर माना गया है। वैसे अन्य पशुओं की नाल के भी विविध उपयोग होते हैं। यहाँ केवल मार्जारी (बिल्ली) की नाल का ही तांत्रिक प्रयोग लिखा जा रहा है, जिसे सुलभ हो, इसका प्रयोग करके लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकता है।
जब पालतू बिल्ली का प्रसव काल निकट हो, उसके लिए रहने और खाने की ऐसी व्यवस्था करें कि वह आपके कमरे में ही रहे। यह कुछ कठिन कार्य नहीं है, प्रेमपूर्वक पाली गई बिल्लियाँ तो कुर्सी, बिस्तर और गोद तक में बराबर मालिक के पास बैठी रहती हैं। उस पर बराबर निगाह रखें। जिस समय वह बच्चों को जन्म दे रही हो, सावधानी से उसकी रखवाली करें। बच्चों के जन्म के तुरंत बाद ही उसके पेट से नाल (झिल्ली) निकलती है और स्वभावतः तुरंत ही बिल्ली उसे खा जाती है। बहुत कम लोग ही उसे प्राप्त कर पाते हैं। अतः उपाय यह है कि जैसे ही बिल्ली के पेट से नाल बाहर आए, उस पर कपड़ा ढँक दें। ढँक जाने पर बिल्ली उसे तुरंत खा नहीं सकेगी। चूँकि प्रसव पीड़ा के कारण वह कुछ शिथिल भी रहती है, इसलिए तेजी से झपट नहीं सकती। जैसे भी हो, प्रसव के बाद उसकी नाल उठा लेनी चाहिए। फिर उसे धूप में सुखाकर प्रयोजनीय रूप दिया जाता है।
धूप में सुखाते समय भी उसकी रखवाली में सतर्कता आवश्यक है। अन्यथा कौआ, चील, कुत्ता आदि कोई भी उसे उठाकर ले जा सकता है। तेज धूप में दो-तीन दिनों तक रखने से वह चमड़े की तरह सूख जाएगी। सूख जाने पर उसके चौकोर टुकड़े (दो या तीन वर्ग इंच के या जैसे भी सुविधा हो) कर लें और उन पर हल्दी लगाकर रख दें। हल्दी का चूर्ण अथवा लेप कुछ भी लगाया जा सकता है। इस प्रकार हल्दी लगाया हुआ बिल्ली की नाल का टुकड़ा लक्ष्मी यंत्र का अचूक घटक होता है।
तंत्र साधना के लिए किसी शुभ मुहूर्त में स्नान-पूजा करके शुद्ध स्थान पर बैठ जाएँ और हल्दी लगा हुआ नाल का सीधा टुकड़ा बाएँ हाथ में लेकर मुट्ठी बंद कर लें और लक्ष्मी, रुपया, सोना, चाँदी अथवा किसी आभूषण का ध्यान करते हुए 54 बार यह मंत्र पढ़ें- ‘मर्जबान उल किस्ता’। इसके पश्चात्‌ उसे माथे से लगाकर अपने संदूक, पिटारी, बैग या जहाँ भी रुपए-पैसे या जेवर हों, रख दें। कुछ ही समय बाद आश्चर्यजनक रूप से श्री-सम्पत्ति की वृद्धि होने लगती है। इस नाल यंत्र का प्रभाव विशेष रूप से धातु लाभ (सोना-चाँदी की प्राप्ति) कराता है।