Tuesday, June 12, 2012

पढाई के लिए ! EDUCATION


अधिकतर पढाई करने के बाद सन्तान की नौकरी और व्यवसाय की चिन्ता हर मातापिता को होती है,बच्चे जवानी और अपनी उमंग के कारण उन्हे कौन से क्षेत्र में जानाहै,उसे भूल जाते है,और दूसरों की देखा देखी अपनी वास्तविक नोलेज को भूलकर दूसरोंके चक्कर में पड कर अपने को बरबाद कर लेते है,जब वे अपनी योग्यता को नहीं दिखापाते है तो वे गलत कार्यों की तरफ बढ जाते है,और उनका जीवन जो सहज रास्ते पर जारहा था वह कठिनाइयों की तरफ चला जाता हैदिग्भ्रम हो जाने पर लाख कोशिश करनेपर भी बच्चे अपनी जगह पर वापस नही  पाते है,और आते है तब तक उनका बहुमूल्यसमय बरबाद हो गया होता है। सबसे पहले अपने बच्चे को सही रास्ते पर लाने के लियेया वह कहीं गलत रास्ते पर तो नही जा रहा है,का ध्यान उसी प्रकार से रखना चाहियेजैसे एक माली अपने पेड को संभालता है,कब उसे पानी देना है कब उसमें खाद देनीहै,कही जंगली जानवर उस पेड को खत्म तो नही कर रहा है,कहीं कोई बीमारी पेड को तोनही लग रही है,कहीं कोई खरपतवार उस पेड के साथ तो नही उग रहा है जो उस पेड कोदी जाने वाली खाद पानी को पेड तक पहुंचने ही नही देना चाहता हो,आदि बातें ध्यान मेंरखने पर बच्चे को सही दिशा तक ले जाया सकता है। बच्चे को सही रास्ते पर ले जाने केलिये वैदिक रूप से कुछ उपाय बताये गये है,उनको आप लोगों के लिये लिख रहा हूँ।

1.  
रात को सोते समय बच्चे के सिरहाने उसकी दाहिनी तरफ पानी का एक लोटा यागिलास रखना चाहिये,जिससे रात को सोते समय कुविचार उसके सुषुप्त मस्तिक परअसर नही दे पायें।
2.  
बच्चे के जगने पर उसके पास जरूर उपस्थित रहें,जितना बच्चा जगने के बाद आपकोदेखेगा,उतना ही वह दिन भर आपकी तस्वीर को वह अपने दिमाग में रखेगा,अधिकसमय तक आपको अपने सामने पाने पर वह कभी आपको अलग नही कर पायेगा,औरगल्ती करने पर आपकी ही तस्वीर उसके दिमाग में आकर उसे गलत काम से रोकेगी।
3.  
बच्चे को अपने हाथ से खाना परोसना चाहिये,बनाया चाहे किसी ने भी हो,उसे बच्चेकी रुचि के अनुसार अगर आपके हाथ से परोसा गया है तो वह उसके शरीर में उसी तरहसे लगेगा जिस प्रकार से बचपन में माँ का दूध लगता है।
4.  
बच्चे को दूसरों की नजर जरूर लगती है,चाहे वह अपने ही घर वालों की क्यों हो,शाम को बच्चा जब बिस्तर पर सोने जाये तो एक पत्थर को बच्चे के ऊपर से ओसाराकरने के बाद किसी पानी से धोकर एक नियत स्थान पर रख देना चाहिये,जिस दिनखतरनाक नजर लगी होगी या कोई बीमारी परेशान करने वाली होगी,वह पत्थर अपनेस्थान पर नही मिलेगा,अथवा टूटा मिलेगा।

पढाई में याददास्त बढाने का टोटका

याददास्त कोई हौवा नही है,कि याद होता नही है,और याद होता नही है तो पढाई बेकार हो जाती है,परीक्षा में परिणाम नकारात्मक आता है,और दिमाग का एक कौना मानने लगता है कि यह पढाई बेकार है,इसे छोड कर कोई जीवन यापन का काम कर लेना चाहिये,और इस बेकार के झमेले को छोड देना चाहिये, लेकिन नही अगर वास्तव मे आपको पढने का चाव है और आप चाहते है कि आपका परिणाम भी उन्ही लोगों की तरह से आये जैसे कि ब्रिलियेंन्ट बच्चों का आता है, तो इस टोटके को अंजवा लीजिये।
शाम को खाना खा कर बायीं करवट ढाई घंटे के लिये लेट जाइये,फिर ढाई घंटे दाहिनी करवट लेट जाइये, और ढाई घंटे उठकर सीधे बैठ कर पढना चालू कर दीजिये,यह क्रम लगातार चालू रखिये,देखिये कि जो टापिक कभी याद नही होते थे, इतनी अच्छी तरह से याद हो जायेंगे कि खुद को विश्वास ही नहीं होगा।

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